नीमच। जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय पर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें सरपंच व सरपंच प्रतिनिधि कुछ लोगों से परेशान होकर न्याय की गुहा लगाने पहुंचे। मामला क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुंचडोद का है जहाँ सरपंच शांति बाई दुर्गाशंकर मेघवाल ने कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के नाम आवेदन दिया गया। जिसमें बताया की गांव के पूर्व सरपंच, वर्तमान उपसरपंच और उनके साथियो द्वारा मुझे व मेरे पति को जब से सरपंच पद भार ग्रहण किया, तब से यह लोग मुझे कोई भी विकास का कार्य नहीं करने देते हैं, जिले की सभी जनप्रतिनिधियों को बोलते है की मेरी किसी प्रकार से कोई मदद नहीं करे और मुझे आज तक इन लोगो ने कोई ग्राम सभा की बैठक नहीं करने दी। जब भी बैठक होती है वहा पहुंच कर ये लोग बैठक में जबरन बाधित करते हैं। साथ ही वहाँ उपस्थित पंचो को किसी भी ठहराव प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करने देते है और फिर शिकायत करते हैं की मैंने कोई भी ग्राम सभा की बैठक नहीं की और ना ही कोई ठहराव प्रस्ताव से कार्य किया, ये सभी लोग मैं सरपंच बनी तब मेरे साथ थे और मैं दलित हु गरीब हु इसलिए मुझे दबाकर रखते थे और मुझे गलत कार्य करने के लिए बाधित करते थे। और पंचायत में काम कर रहे गरीब कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के लिए दबाव बना रहे थे और मेने इनके मंशानुसार काम नहीं किया तो मेरे तो खिलाफ ये लोग आए दिन शिकायत करते है। यह लोग आदतन शिकायती हैं ये पिछले कई वर्षों से शिकायते कर रहे है, शिकायत कर्ता अमृतराम गायरी जो की उपसरपंच पति है इनका बड़े भाई आनंदीलाल गायरी शासकीय शिक्षक है जो की ग्राम पंचायत के हाई स्कुल में ही पदस्थ हैं। उसने ओर उसके परिवार के लोगो ने लगभग 40 बीघा से अधिक शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा हैं और ये मुझे हटाकर उपसरपंच पति उस जमीन को हथियाना चाहता हैं। यही ग्राम पंचायत के अमृतराम गायरी, देवीलाल गुर्जर, सूरजसिंह सोनिगरा, राजमल लोहार शांति भंग कर मुझ गरीब दलित को अत्यधिक परेशान कर रहे है। जिसके कारण मै और मेरा परिवार काफ़ी दुखी हो गया हैं ये लोग ग्राम पंचायत मै कही भी कोई विकास कार्य करती हु मुझे करने नहीं देते हैं और परेशान करते हैं। मै विकास के कार्य करना चाहती हु मुझे गांव की सम्मानित जनता ने चुनकर बहुमत दिया हैं ओर मै जनता के भरोसे को तोडना नहीं चाहती हु। जहाँ सरकार महिलाओ को हर जगह बढ़ावा दे रही है देश मै गरीब को भी प्रतिनिधित्व का अवसर मिले है ओर संविधान के आरक्षण अनुसार मुझे गांव की जनता ने अवसर दिया। मै गरीब हु परन्तु इन लोगो ने मुझे लाचार भी कर दिया, मेरा परिवार मेरे बच्चे बहुत डरे हुए हैं मेरे साथ कभी भी कुछ भी घटना हो सकती है ये लोग जान से मारने की धमकिया देते हैं और मै प्रताड़ित होकर कोई भी गलत कदम उठाने के लिए मजबूर हु। वही आवेदन में सरपंच द्वारा न्याय की मांग करते हुए गांव के विकास मै मदद करने की बात कही गई, साथ ही सरपंच प्रतिनिधि द्वारा बताया गया की हम इतने प्रताड़ित हो गए हैं की आत्महत्या करने पर मजबूर बन बैठे है। वही इन लोगो को कड़ी से कड़ी सजा दे की बात की गई।