नीमच। लगभग आठ वर्ष पूर्व डंपर चालक से रंगदारी करने के आरोप में भारतीय जनता युवा मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भीमावत सहित चार युवकों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी। आरोपियों को गिरफ्तार कर सुबह न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। वहीं भूपेंद सिंह का कहना था कि ये मेरे खिलाफ साजिश है मेरे कुछ साथियों का लेनदेन के मामले में विवाद हुआ था। विवाद समाप्त होने के बाद साथियों को छोड़ अपने गृहग्राम डसानी जा रहा था, रास्ते में पुलिस ने रोककर थाने चलने को कहा। सीएसपी से चर्चा की तो उन्होने जांच में सहयोग करने की बात कही। थाने पर पहुंचे कि कुछ ही घंटों में घटनाक्रम परिवर्तित हो गया। मुझे भी सह आरोपी बना दिया गया। ओर आज आए न्यायालय के फैसले से ये स्पष्ट भी हो गया कि यह केस रंगदारी का नहीं था तो क्या भूपेंद सिंह की बढ़ती लोकप्रियता ओर पार्टी में बढ़ता कद कही न कही दिग्गज नेताओं को रास नहीं आ रहा था। बढ़ती लोकप्रियता रास नहीं आई दिग्गजों को_ विद्यार्थी परिषद में अपनी काबिलियत का परचम लहलाकर युवा मोर्चा में जिलाध्यक्ष बने भीमावत की दिन प्रतिदिन लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी।। जिले में जहा कही भी जाते थे युवाओं का मेला लग जाता था बस यही बात अपनी ही पार्टी के दिगज्जो को खटकने लगी। नीमच की राजनीति को अपनी जागीर समझने वाले लोगों को अपनी कुर्सी खिसकने की चिंता सताने लगी ,बस उनको एक मौका चाहिए था जो उन्हें मिल गया और उसे अच्छी तरह भुना डाला। खैर इससे उस वक्त भीमावत को पद से नहीं हटवा पाए क्योंकि जिले में महेंद्र भटनागर सहित कुछ दिग्ग्ज ऐसे भी थे जो भीमावत के साथ अड़े रहे।। आज भीमावत को न्यायालय ने क्लीन चिट दे दीं। लेकिन कुर्सी की महत्वाकांक्षा वाले ने एक बेहतरीन युवा लीडर का राजनीति करियर पीछे धकेल दिया।